गांव का मौसम: हर ऋतु में बसती है सादगी की सुंदरता
देखो हमारे गांव का मौसम कितना सुहाना है,
ताज़गी और हरियाली का यहां हर कोई दिवाना है।
ताज़गी और हरियाली का यहां हर कोई दिवाना है।
चार बजे उठते हैं पंडित जी घंटी मन्दिर की बजाने को,
शहर के शोर से दूर यहां अलार्म नहीं जगाने को।
पिता जी ने भी उठकर कर रहे त्यारी नहाने को।
शहर के शोर से दूर यहां अलार्म नहीं जगाने को।
पिता जी ने भी उठकर कर रहे त्यारी नहाने को।
गांव का मौसम – प्रकृति, शांति और यादों की कविता
आंख खुली जब देख मैने इक अजीब सी जन्नत है,
शांत सा वातावरण, चुप सी हवा, मद्धम सी ठंडक है।
शांत सा वातावरण, चुप सी हवा, मद्धम सी ठंडक है।
बारी बारी से उठकर सभी ने राम नाम का नाम लिया,
सबसे पहले उठकर सभी ने धरती मां को प्रणाम किया।
सबसे पहले उठकर सभी ने धरती मां को प्रणाम किया।
सूर्य देव के आते ही इक अजीब सी रौनक छाई है,
पिता जी ने नहाकर स्वच्छ जल की धारा बहाई है।
पिता जी ने नहाकर स्वच्छ जल की धारा बहाई है।