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जय गणेश जय गणेश देवा श्री गणेश जी की आरती (भावार्थ सहित)

जय गणेश जय गणेश देवा श्री गणेश जी की आरती (भावार्थ सहित)

   जय गणेश जय गणेश देवा श्री गणेश जी की आरती (भावार्थ सहित)

आधुनिक और रंगीन शैली में श्री गणेश जी की आरती का पावन दृश्यगणेश जी की आरती का अर्थ
पौराणिक मान्यता के अनुसार श्री गणेश जी को यह वरदान मिला कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत सबसे पहले उन्हीं की पूजा से होगी। इसी कारण उन्हें “प्रथम पूज्य” कहा जाता है। गणेश जी की आरती करने का अर्थ है अपने कार्य को सही दिशा में शुरू करना और उनसे विघ्न दूर करने की प्रार्थना करना। जब भक्त आरती करता है, तो वह यह भाव रखता है कि बिना ईश्वर की कृपा के कोई भी कार्य पूर्ण नहीं होता। यही विश्वास मन में श्रद्धा और आस्था को और मजबूत करता है।
गणेश जी की आरती का महत्व
आरती का महत्व इस बात में है कि यह पूजा को पूर्णता देती है और मन को एक दिशा में जोड़ती है। गणेश जी की आरती करने से वातावरण में शांति का भाव बनता है। यह हमें धैर्य, संयम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
गणेश जी की आरती के लाभ
नियमित रूप से आरती करने से मन में एकाग्रता बढ़ती है और बेचैनी कम होती है। इससे सोच अधिक स्पष्ट होती है और आत्मविश्वास मजबूत होता है। कई लोग अनुभव करते हैं कि आरती के बाद मन हल्का और वातावरण अधिक सकारात्मक महसूस होता है।
गणेश जी की आरती कैसे करें
आरती से पहले मन को शांत करें और दीपक जलाएँ। फिर धीरे-धीरे आरती गाते हुए भगवान का स्मरण करें। शब्दों के भाव पर ध्यान रखें, केवल औपचारिकता न निभाएँ। अंत में कुछ क्षण शांत बैठकर मन में कृतज्ञता का भाव रखें।

 श्री गणेश जी की आरती

 जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
          माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

          एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
          माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

         जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
          माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

          पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
        लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

        जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
        माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

        अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
        बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

        जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
         माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

        सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
        माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

श्री गणेश जी की आरती पंक्ति दर पंक्ति अर्थ

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
हे गणेश जी! आपकी जय हो, आप दिव्य और पूजनीय देवता हैं।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
आप माता पार्वती के पुत्र और भगवान शिव के आत्मज हैं।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
आप एक दांत वाले, करुणा से भरे हुए और चार भुजाओं वाले हैं।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
आपके मस्तक पर सिंदूर शोभायमान है और आप मूषक पर विराजमान रहते हैं।
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
भक्त श्रद्धा से आपको पान, पुष्प और मेवे अर्पित करते हैं।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
आपको लड्डुओं का भोग अति प्रिय है और संतजन आपकी सेवा में लगे रहते हैं।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
आप अज्ञानियों को ज्ञान की दृष्टि देते हैं और रोगियों को स्वस्थ शरीर प्रदान करते हैं।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
आप संतानहीन को संतान और निर्धन को धन-समृद्धि का वरदान देते हैं।
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
जो भक्त सच्चे मन से आपकी शरण में आता है, उसकी भक्ति को आप सफल करते हैं।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
आप माता पार्वती और पिता महादेव के कृपापात्र पुत्र हैं।
दीपों की रोशनी में की जा रही श्री गणेश जी की आरती का भक्तिमय दृश्य
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
श्री गणेश जी की आरती कब करनी चाहिए?
श्री गणेश जी की आरती प्रातःकाल, संध्या समय या किसी भी शुभ कार्य से पहले की जा सकती है। विशेष रूप से बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या प्रतिदिन गणेश जी की आरती करना लाभकारी है?
हाँ, प्रतिदिन श्रद्धा के साथ गणेश जी की आरती करने से मन शांत रहता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और कार्यों में एकाग्रता व सफलता प्राप्त होती है।
श्री गणेश जी की आरती में लड्डू का विशेष महत्व क्यों है?
लड्डू भगवान गणेश का प्रिय भोग माना जाता है। यह आनंद, समृद्धि और संतोष का प्रतीक है, इसलिए आरती में लड्डू का भोग अर्पित किया जाता है।
क्या बिना पूजा सामग्री के भी गणेश जी की आरती की जा सकती है?
हाँ, सच्ची श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है। यदि पूजा सामग्री उपलब्ध न हो, तो भी मन से भगवान गणेश का स्मरण कर आरती करना पूर्ण फलदायी माना जाता है।
श्री गणेश जी की आरती करने से क्या लाभ मिलते हैं?
गणेश जी की आरती करने से विघ्न दूर होते हैं, बुद्धि और विवेक का विकास होता है तथा जीवन में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
निष्कर्ष
श्री गणेश जी की आरती केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। आरती के प्रत्येक शब्द में विघ्नों को दूर करने, बुद्धि को जागृत करने और जीवन में संतुलन लाने का भाव निहित है। जब भक्त सच्चे मन से इस आरती का पाठ करता है, तो उसका मन स्थिर होता है और कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रतिदिन या विशेष अवसरों पर श्री गणेश जी की आरती करने से मन में शांति, घर में सौहार्द और जीवन में शुभता का अनुभव होता है। यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण और उनकी आरती का पाठ किया जाता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई आरती निश्चित रूप से जीवन को मंगलमय बनाती है।

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