भागवत पुराण संपूर्ण विवरण (रचना, विषय-वस्तु, कथाएँ और मंत्र)
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भागवत पुराण (श्रीमद्भागवत महापुराण) सनातन धर्म के अठारह महापुराणों में सर्वाधिक प्रतिष्ठित और भक्तिमय ग्रंथ माना जाता है। यह पुराण विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण की लीला, भक्ति-मार्ग, वैराग्य और ज्ञान का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में भागवत पुराण को केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन के रूप में स्वीकार किया गया है।
भागवत पुराण का मूल उद्देश्य मनुष्य को कर्म, ज्ञान और भक्ति तीनों मार्गों का संतुलित बोध कराते हुए भगवद्-भक्ति की ओर प्रेरित करना है। इसमें सृष्टि-उत्पत्ति, अवतार-कथाएँ, राजाओं की वंशावली, योग-वैराग्य और मोक्ष के उपायों का विस्तार से वर्णन मिलता है।
भागवत पुराण की रचना, रचयिता कौन हैं
भागवत पुराण की संरचना
भागवत पुराण में कुल 12 स्कंध, 335 अध्याय और लगभग 18,000 श्लोक हैं। प्रत्येक स्कंध अपने-अपने विषय के लिए प्रसिद्ध है।
राजा परीक्षित का प्रसंग
शुकदेव जी द्वारा भागवत कथा का उपदेश
विराट पुरुष का वर्णन
भक्ति के स्वरूप
कपिल मुनि और देवहूति संवाद
सांख्य दर्शन
ध्रुव चरित्र
पृथु महाराज की कथा
नवद्वीप और भुवन-कोश
कर्म और पुनर्जन्म का सिद्धांत
नाम-स्मरण की महिमा
यमदूत और विष्णुदूत संवाद
नृसिंह अवतार
भक्त और भगवान का संबंध
वामन अवतार
गजेंद्र मोक्ष
श्रीराम कथा का संक्षिप्त वर्णन
मथुरा और द्वारका की कथाएँ
वैराग्य और ज्ञान का उपदेश
पुराण का उपसंहार
भागवत पुराण के प्रमुख पात्र: श्रीकृष्ण, नारद मुनि, शुकदेव जी, राजा परीक्षित, प्रह्लाद, ध्रुव, भरत महाराज।
भागवत पुराण के प्रमुख मंत्र
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ||
अहैतुकी अप्रतिहता यया आत्मा सुप्रसीदति ||
भागवत पुराण केवल कथा-पुस्तक नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक परंपरा का मूल आधार है। इससे विकसित हुई भागवत परंपरा में कथा, कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन को साधना का मुख्य मार्ग माना गया। यह ग्रंथ भक्ति को केवल भावना नहीं, बल्कि जीवन-पद्धति के रूप में प्रस्तुत करता है।
भागवत पुराण में नवधा भक्ति का व्यावहारिक स्वरूप मिलता है, जहाँ साधक को बताया गया है कि ईश्वर-प्राप्ति केवल पूजा से नहीं, बल्कि श्रवण, स्मरण और सेवा जैसे आचरण से संभव है। यही कारण है कि यह पुराण जनसाधारण के लिए भी अत्यंत उपयोगी बनता है।
इस ग्रंथ ने भारत के भक्ति आंदोलन को गहराई से प्रभावित किया। संतों की वाणी, कीर्तन परंपरा और कृष्ण-भक्ति का प्रसार इसी से प्रेरित है। भागवत पुराण में स्त्री भक्तों और साधारण पात्रों को उच्च आध्यात्मिक स्थान देकर यह सिद्ध किया गया कि भक्ति में कोई भेद नहीं होता।
गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से यह पुराण बताता है कि ज्ञान केवल अध्ययन से नहीं, बल्कि अनुभवी गुरु के सान्निध्य से प्राप्त होता है। साथ ही राजा परीक्षित की कथा मृत्यु-बोध के माध्यम से यह सिखाती है कि अंतिम क्षणों में भी ईश्वर-स्मरण ही परम आश्रय है।
आधुनिक जीवन में भागवत पुराण आसक्ति रहित कर्म, मानसिक संतुलन और उद्देश्यपूर्ण जीवन की प्रेरणा देता है, जिससे व्यक्ति भीतर से शांत और सशक्त बनता है।
यह भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और लीलाओं पर आधारित वैष्णव महापुराण है।
भागवत पुराण के रचयिता कौन हैं?
महर्षि वेदव्यास।
भागवत पुराण में कितने स्कंध हैं?
कुल 12 स्कंध।
भागवत पुराण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मनुष्य को निष्काम भक्ति द्वारा मोक्ष की ओर ले जाना।
भागवत पुराण का सबसे प्रसिद्ध स्कंध कौन-सा है?
दशम स्कंध, जिसमें श्रीकृष्ण की लीलाएँ हैं।
भागवत पुराण में किस अवतार का विशेष वर्णन है?
भगवान श्रीकृष्ण।
भागवत पुराण में भक्ति का स्वरूप कैसा बताया गया है?
अहैतुकी और निष्काम भक्ति।
भागवत पुराण कलियुग में किस साधना को श्रेष्ठ मानता है?
हरिनाम संकीर्तन।
भागवत कथा का उपदेश किसने दिया?
शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को।
भागवत पुराण का मुख्य संदेश क्या है?
भगवान से प्रेम ही जीवन का परम सत्य है।
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