मकर संक्रांति 2026: धर्म, पूजा, शुभ समय, दान‑दान और राशिफल उपाय

मकर संक्रांति 2026: धर्म, पूजा, शुभ समय, दान‑दान और राशिफल उपाय 

मकर संक्रांति के दिन नदी तट पर भक्त द्वारा उगते सूर्य को जल और पुष्प अर्पित करते हुए सूर्य देव की पूजा
1. मकर संक्रांति: परिचय और शास्त्रानुसार महत्व
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पर्व है, जो प्रतिवर्ष जनवरी महीने में आता है। यह त्योहार सूर्य के मकर (Capricorn) राशि में प्रवेश करने के समय मनाया जाता है। शास्त्रों में इसे वर्ष का एक ऐसा दुर्लभ दिवस माना गया है जब सूर्य की उत्तरी दिशा (उत्तरायण) यात्रा प्रारंभ होती है, जो जीवन के लिये स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
मकर संक्रांति का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह सूर्यदेव के परिवर्तन, ऋतुओं के बदलने, कर्मफल के ग्रहण तथा आत्मिक उन्नति के अनेक पहलुओं का प्रतीक है। 
यह वह समय है जब प्रकृति का चक्र एक नई दिशा में अग्रसर होता है और मनुष्य जीवन में सुख, सौभाग्य तथा परिवार में आनन्द की अनुभूति होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि मकर संक्रांति के दिन की गई पूजा, दान‑दान, तिल‑गुड़ का सेवन तथा सूर्यदेव की अराधना से पापों का नाश, आयु की वृद्धि, सम्पत्ति की वृद्धि तथा धर्म और अर्थ की प्राप्ति होती है।
“सूर्य संक्रांति के समय किये गये दान से लक्ष्मी का विकास होता है, तथा व्यक्ति के मन में परमात्मा के प्रति समर्पण और भक्ति भाव जागृत होता है।”
2. मकर संक्रांति 2026 - तिथि और शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति 2026 की तिथि, सूर्योदय समय और शुभ मुहूर्त दर्शाता हुआ पारंपरिक हिंदू कैलेंडर
संक्रांति का दिन 14 जनवरी 2026 है, क्योंकि इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। मकर संक्रांति का शुभ समय (सूर्योदय आधारित):
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का समय प्रातः के बीच होता है, दैनिक शुभ मुहूर्त (स्नान, पूजा, दान) - प्रातःकाल से मध्यान तक ही श्रेष्ठ माना जाता है, संध्या के समय से पूर्व तक दान करना अधिक फलदायी है, शास्त्रों के अनुसार सुबह का प्रथम प्रहर, सूर्य के उदय के समय तथा दोपहर तक का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है।
मान्यता है कि यदि मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्य को अर्घ्य, विशेष पूजन, तथा दान‑दान किया जाये तो व्यक्ति को विश्व कल्याण की प्रार्थना का फल भी मिलता है।
3. मकर संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
मकर संक्रांति के दिन छत पर बच्चों द्वारा रंग-बिरंगी पतंग उड़ाते हुए उत्सव का आनंद
सूर्य का उत्तरायण होना हिंदू धर्म में सूर्य को जीवन दाता, ऊर्जा स्रोत और आत्मा का प्रतीक माना जाता है। जब सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण की ओर अग्रसर होता है, तो उस समय को बेहद शुभ माना गया है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को "उत्तरायण" का शुभ प्रारंभ कहा गया है।
उत्तरायण काल में सूर्य की किरणें स्थिर और सकारात्मक दिशा में चलती हैं, जिससे पृथ्वी पर उर्जा का संचार और जीवन की गुणात्मक वृद्धि होती है। इसलिए संक्रांति के दिन किये गये सत्कर्म, दान और पूजा का प्रभाव सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक फलदायी माना गया है।

मकर संक्रांति 2026: धर्म, पूजा, शुभ समय, दान‑दान और राशिफल उपाय 

ऋतुओं का बदलना
मकर संक्रांति के समय शीत ऋतु की समाप्ति और गर्मी की ओर संक्रमण शुरू होता है। पुराणों में इसे प्रकृति के चक्र का महत्वपूर्ण बदलाव कहा गया है। इससे जीवन में नई ऊर्जा, स्वास्थ्य में सुधार और मन में सकारात्मक भावना का विकास होता है।
कर्मफल की प्राप्ति
शास्त्रों के अनुसार संक्रांति के दिन किये गये कर्म विशेषकर दान, सत्य भाषण, ब्रह्मचर्य पालन, सत्य पालन का फल अन्य समय की अपेक्षा कई गुना होता है। ऋषि‑मुनियों ने इसे उच्च आध्यात्मिक नियमों के अनुरूप जीवन में मधुरता, सौभाग्य तथा मुक्ति की ओर अग्रसर करने वाला समय बताया है।
4. सूर्यदेव की पूजा विधि विस्तृत चरणबद्ध मार्गदर्शन
मकर संक्रांति के दिन सुबह उठकर सबसे पहले शुद्धता और संयम का पालन करें।
नीचे दी गयी पूजा विधि को क्रमबद्ध रूप से अपनायें:
मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करते हुए भक्त, दीपक, पुष्प, तुलसी और तिल गुड़ के साथ पारंपरिक पूजन
पूजन पूर्व तैयारी
1. सुबह स्वच्छ शरीर से उठें
2. हलान्तक व्रत का संकल्प लें (यदि व्रती हैं)
3. गंगाजल से स्नान करें
4. श्वेत वस्त्र पहनें
5. पूजन स्थल को साफ करके लेकर गंगा जल छिड़कें
पूजन सामग्री
लाल वस्त्र
सूर्य देव के चित्र/प्रतिमा
पुष्प, धूप, दीप
तांबे या मिट्टी का दीपक
कच्चा दूध, जल
तिल, गुड़, भोग सामग्री
पूजा क्रम
1. सूर्य देव का संकल्प लें:
“ॐ सूर्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सवितुर् वरेण्यं भर्गः देस्य धीमहि।”
2. जल अर्घ्य देना:
प्रातः सूर्योदय के समय गंगाजल में एक चमच चावल डालें और हाथ में पके हुए तिल‑गुड़ लेकर सूर्य की ओर जल अर्पित करें।
3. दीप तथा पुष्प अर्पण:
 सूर्य देव के चित्र/प्रतिमा के सामने दीपक जलायें और मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष पुष्प अर्पण करें।
4. भोग लगायें:
तिल‑गुड़, खिचड़ी, छाछ आदि भोग सूर्य देव को समर्पित करें।
5. सूर्य मंत्र का जाप:
“ॐ आदित्याय विद्महे रवये धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।”
इसे 108 बार जपना उत्तम फलदायी माना गया है।
6. आशीर्वाद एवं प्रणाम:
सूर्य देव को प्रणाम देकर पूजन समाप्त करें। ध्यान रखें:
पूजा के दौरान मन को शांत रखें, शास्त्रों के अनुसार पूजा का मुख्य उद्देश्य 'मन की शुद्धि तथा आत्मा की उन्नति' है।
5. शुभ समय और मुहूर्त  - संक्रांति दिवस
प्रातःकाल
मकर संक्रांति के दिन सबसे शुभ समय प्रातः सूर्य उदय से लेकर मध्यान तक माना गया है। सूर्योदय का समय: लगभग 07:15 बजे (स्थानानुसार अलग हो सकता है) दिन का शुभ समय: 07:15 - 12:30 बजे, इस दौरान किया गया दान, पूजा, मंत्र जाप और उपवास विशेष फलदायी है।
6. दान‑दान की परंपरा और शास्त्रानुसार विधि
मकर संक्रांति के अवसर पर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अनाज का दान करते हुए भक्त
मकर संक्रांति पर "दान करना अत्यंत पवित्र" और श्रेष्ठ कर्म माना गया है। दान से मनुष्य को न केवल पुण्यबल मिलता है, बल्कि जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और संयम की प्राप्ति होती है।
दान का शास्त्रीय महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ‑साथ दान करना व्यक्ति को "भौतिक और आध्यात्मिक प्रगति का द्वार" खोलता है। दान को कल्याणकारी कर्म माना गया है जो पापों का नाश कर सुख एवं संतोष प्रदान करता है।
मकर संक्रांति पर दान करने योग्य वस्तुएँ, नीचे दान के लिये श्रेष्ठ वस्तुओं की सूची दी जा रही है:
1. तिल - काले/सफेद दोनों ही शुभ माने जाते हैं
2. गुड़ - मीठे भाव और सौम्य बुद्धि का प्रतीक
3. चावल - समृद्धि का प्रतीक
4. दालें - जीवन में स्थिरता के लिये
5. दही/लस्सी - सौभाग्य और शांति के लिये
6. चाय सामग्री - सत्कार और उत्साह का प्रतीक
7. कपड़ा - जरूरतमंदों को वस्त्र दान
दान देने की विधि, दान करते समय ध्यान रखें: 
दान स्नेहपूर्वक और सम्मान के साथ करें।
दान से पहले हृदय में शुद्ध भावना रखें।
दान के पश्चात मन में घमंड न होने दें।

दान का वार्षिक फल शास्त्रों के अनुसार चार भागों में विभाजित होता है:
1. आधुनिक लाभ - सुख, शांति
2. आर्थिक लाभ - धन की वृद्धि
3. आध्यात्मिक लाभ - मन की शुद्धि
4. परिणामी लाभ - योग, ध्यान, मुक्ति के मार्ग में प्रगति
7. तिल‑गुड़ का वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बना पारंपरिक प्रसाद, धार्मिक दान और भोग का प्रतीक
धार्मिक दृष्टि
तिल‑गुड़ को हिन्दू धर्म में पवित्र तत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार:
तिल का तात्पर्य - सत्य, कर्म, परोपकार, गुड़ का तात्पर्य - मिठास, सौहार्द, सद्भावना, जब तिल और गुड़ एक साथ सेवन किये जाते हैं, तो यह शरीर को ऊर्जा, मन को संतोष और आत्मा को प्रसन्नता प्रदान करता है।
वैज्ञानिक दृष्टि
तिल (Sesame Seeds) में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम होता है जबकि गुड़ में प्राकृतिक शर्करा और पोषक तत्व होते हैं। संयोजन से शरीर को ठंडी ऋतु में ऊर्जा‑पूर्णता मिलती है तथा पाचन सुगम होता है।
सुरक्षित सेवन:
संक्रांति के दिन सुबह‑सुबह एक मुट्ठी तिल‑गुड़ का सेवन स्वास्थ्य के लिये अत्यंत लाभदायक होता है।
8. राशि अनुसार संक्रांति उपाय और सलाह
हर व्यक्ति की राशि उसकी जन्म कुंडली के अनुसार अलग‑अलग होती है। संक्रांति के दिन कुछ उपाय विशेष रूप से उन राशियों के लिये फलदायी माने गये हैं:
मेष राशि
सूर्य के उर्जा को स्थिर करने के लिये
उपाय: सुबह तिल‑गुड़ दान करें
मंत्र: “ॐ सूर्याय नमः” 21 बार
वृषभ राशि
संसाधनों में वृद्धि के लिये
उपाय: चावल दान करें
मंत्र: “ॐ रवये नमः” 18 बार
मिथुन राशि
स्वास्थ्य और ऊर्जा के लिये
उपाय: दूध‑दही दान करें
मंत्र: “ॐ आदित्याय नमः” 21 बार
कर्क राशि
मानसिक शांति बढ़ाने के लिये  
उपाय: दीपक दान करें   
मंत्र: “ॐ भानवे नमः” 15 बार                                          
                                       मकर संक्रांति पर राशि अनुसार उपाय दर्शाता हुआ बारह राशियों का आध्यात्मिक मंडल चित्र
सिंह राशि
सम्मान एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिये
उपाय: वस्त्र दान करें
मंत्र: “ॐ सूर्याय नमः” 21 बार
कन्या राशि
संतुलन एवं सकारात्मकता के लिये
उपाय: चाय सामग्री दान करें
मंत्र: “ॐ रवये नमः” 18 बार
तुला राशि
संबंधों में मधुरता के लिये
उपाय: गुड़‑तिल दान करें
मंत्र: “ॐ आदित्याय नमः” 21 बार
वृश्चिक राशि
स्वास्थ्य और आत्मबल के लिये
उपाय: दूध दान करें
मंत्र: “ॐ भानवे नमः” 15 बार
धनु राशि
समृद्धि और भाग्य के लिये
उपाय: चावल दान करें
मंत्र: “ॐ रवये नमः” 18 बार
मकर राशि
जीवन में स्थिरता के लिये
उपाय: वस्त्र और तिल‑गुड़ दान करें
मंत्र: “ॐ सूर्याय नमः” 21 बार
कुंभ राशि
मानसिक उन्नति के लिये
उपाय: दीपक और चाय सामग्री दान
मंत्र: “ॐ आदित्याय नमः” 21 बार
मीन राशि
कल्याण और आत्मिक शांति के लिये
उपाय: चावल, तिल दान करें
मंत्र: “ॐ भानवे नमः” 15 बार
9. संक्रांति के दिन उपवास और व्रत
मकर संक्रांति के दिन यदि व्रत रखा जाये तो वह अत्यंत फलदायी माना गया है।
व्रत का नियम
प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठें
दिनभर शाकाहारी भोजन
तिल‑गुड़, फल, दही, छाछ का सेवन सर्वोत्तम
सूर्य को अर्घ्य देना अनिवार्य
10. व्रत का फल
व्रत से मन की एकाग्रता, आत्म‑नियंत्रण, ऊर्जा का संचय तथा आध्यात्मिक उन्नति होती है। संक्रांति के बाद ध्यान और भजन, मकर संक्रांति के पश्चात सूर्यदेव को समर्पित कुछ भजन और ध्यान बहुत फलदायी माने गये हैं:
भजन (उदाहरण)
“ॐ जय हे सूर्य देव…”
“सूर्य देवता की आरती”
“तिल गुड़ संक्रांति की भजन लिस्ट”
ध्यान विधि
शाम को सूर्यास्त से पूर्व ध्यान करें - शांत स्थान में बैठकर सूर्य की स्मृति करें, दीपक जलायें, मंत्रों का जाप करें।

मकर संक्रांति 2026: धर्म, पूजा, शुभ समय, दान‑दान और राशिफल उपाय 

11.  प्रश्न
मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के कारण मानव जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और कल्याण हेतु मनाई जाती है।
तिल‑गुड़ क्यों लगाया जाता है?
तिल‑गुड़ स्वास्थ्य, मिठास, सौभाग्य और सौहार्द की प्राप्ति के लिये।
दान का सबसे उत्तम समय कौन‑सा है?
सुबह सूर्योदय से मध्यान तक का समय।
मकर संक्रांति पर सूर्य मंत्र का जाप और ध्यान करते हुए भक्त, शांत और आध्यात्मिक वातावरण
12. निष्कर्ष
मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं है यह धर्म, संस्कृति, आध्यात्म और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक है। यह दिन मनुष्य को अपने कर्म, दान‑दान, पूजा और संयम के द्वारा सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ता है।
संक्रांति के दिन सूर्यदेव की पूजा, दान‑दान, तिल‑गुड़ का सेवन तथा मंत्रों का जाप जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। शास्त्र हमें सिखाते हैं कि सत्य, सद्गुण, संयम और दान की शक्ति से जीवन में उन्नति होती है।
इसलिए मकर संक्रांति 2026 को आप सरलता से शास्त्रानुसार मानें, पूजन करें, दान दें और ईश्वर से अपने परिवार, समाज और देश के लिये कल्याण की प्रार्थना करें।
सनातन धर्म के अनुसार यही सच्चा अर्थ है करुणा, भक्ति और समर्पण।